Tuesday, October 20th, 2026

हरियाणा में GST घोटाले में बड़ी कार्रवाई, 89 लोग गिरफ्तार

 हरियाणा

 पुलिस ने बडे पैमाने पर माल एवं सेवा कर (जीएसटी) घोटाले के खिलाफ एक सुव्यवस्थित अभियान के तहत कार्रवाई करते हुए जीएसटी फर्जी चालान बिल घोटाले में शामिल फर्जी फर्मों के 4 प्रमुख गिरोह सहित अन्य आरोपियों का पर्दाफाष किया है। इन फर्जी फर्मों ने धोखाधड़ी के माध्यम से 464.12 करोड़ रुपये से अधिक की राशि का गोलमाल कर सरकारी खजाने को नुकसान पहुंचाया। इन जालसाजों की सांठगांठ न केवल हरियाणा में बल्कि पूरे देश में सक्रिय थी।

 

जीएसटी फर्जी चालान घोटाले में पुलिस ने अबतक 112 करोड़ रुपये से अधिक की रिकवरी कर जाली जीएसटी आइडंटिफिकेषन नंबर (जीएसटीआईएन) का भी खुलासा किया है। इस संबंध में अब तक राज्य अपराध षाखा के पास कुल 72 पुलिस मामले दर्ज हुए हैं, जिसमें 89 अभियुक्तों को गिरफ्तार किया गया है। कुल गिरफ्तारी में अधिकतम 40 मामले गोविंद शर्मा, गौरव, अनुपम सिंगला और राकेश अरोड़ा के खिलाफ दर्ज किए गए हैं।

 

पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) हरियाणा श्री मनोज यादव ने रविवार को इस संबंध में खुलासा करते हुए बताया कि इन व्यक्तियों ने फर्जी ई-वे बिल (कंसाइनमेंट ट्रांसपोर्ट करने के लिए जीएसटी से संबंधित चालान) के माध्यम से माल की वास्तविक आपूर्ति के बिना कई फर्मों और कंपनियों को फर्जी चालान जारी किए और जीएसटीआर-3 बी फार्म के माध्यम से जीएसटी पोर्टल पर फेक इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) किए। यह भी खुलासा हुआ कि फर्जी जीएसटी चालान, ई-वे बिल और जाली बैंक लेनदेन की मदद से इन गिरोह द्वारा करोड़ों रुपये की धोखाधड़ी की गई है। जांच के दौरान, यह भी सामने आया कि गिरफ्तार किए गए आरोपियों में से कुछ ऐसे भी हैं जो बार-बार आर्थिक अपराध की प्रवृति के हैं। पुलिस ने अबतक की गई कार्रवाई के तहत आबकारी और कराधान विभाग के माध्यम से दी जाने वाली 97.22 करोड़ रुपये की इनएडमिसीबल आईटीसी पर भी रोक लगाई है।

 

राज्य अपराध षाखा की पीठ थपथपाई

श्री यादव ने भी जीएसटी घोटाले में शामिल रैकेट का भंडाफोड़ करने के लिए डीजीपी क्राइम मोहम्मद अकील और उनकी पूरी टीम को सराहना की। पुलिस की राज्य अपराध षाखा ने फर्जी चालान के माध्यम से आईटीसी का दावा करने वालों पर षिकंजा कसा।

पानीपत और आसपास के क्षेत्रों में सक्रिय गोविंद गैंग से संबंधित फर्जी फर्मों के खिलाफ वर्ष 2019 में कुल 21 एफआईआर दर्ज की गईं, जबकि प्रमुख जीएसटी चोरी में शामिल रहे अन्य तीन गिरोह के खिलाफ 2018 और 2019 के बीच केस दर्ज किए गए। पुलिस ने इन गैंग की आबकारी एवं कराधान विभाग में 80 करोड़ रुपये की आईटीसी को भी ब्लाॅक किया है।

 

डीजीपी ने बताया कि इन जीएसटी चालान घोटाले में शामिल प्रमुख सामान स्क्रैप, आयरन और स्टील आर्टिकल्स, कॉटन-यार्न, पेपर आदि थे। जीएसटी जालसाजों और आईटीसी धोखेबाजों के खिलाफ अभियान तेज होने की उम्मीद है और निकट भविष्य में इन मामलों से जुडी और गिरफ्तारी भी हो सकती है। उन्होंने कहा कि कर देनदारी की वसूली के लिए अन्य लाभार्थियों की पहचान करने के लिए इन मामलों की जांच जारी है।

जालसाज ऐसे करते थे फर्जी बिलों से धोखाधडी

धोखाधडी के तौर-तरीके की जानकारी देते हुए डीजीपी ने बताया कि इन गिरोहों में अधिकतम जालसाज पहले भोले-भाले लोगों के नाम पर जीएसटी पोर्टल पर फर्जी फर्मों का पंजीकरण करते थे और फिर बिज़ीएप्प, टैलीऐप और शकुन सॉफ्टवेयर जैसेएप्स का उपयोग करके इन फर्मों के बिल तैयार करते थे। बाद में जीएसटी पोर्टल पर ई-वे बिल जेनरेट करने के लिए इन बिलों को अपलोड करते थे। इन जालसाजों द्वारा तैयार की गई ई-वे बिल की अधिकतम संख्या क्राइम ब्रांच द्वारा सत्यापन पर फर्जी पाई गई। इन ई-वे बिल में एंबुलेंस, सरकारी वाहन, मोटरसाइकिल, निजी स्वयं के वाहनों से संबंधित वाहन संख्याओं का उल्लेख किया गया है जो वाणिज्यिक उद्देश्यों के लिए उपयोग किए जाने के विपरीत हैं। पुलिस जांच में, बैंक खाता संख्या जो फर्जी फर्म के जीएसटी पंजीकरण फॉर्म में दिखाई गई थी, वह भी संदिग्ध पाई गई। धोखाधड़ी करने वालों ने संबंधित प्राधिकरणों को धोखा देने के लिए अन्य बैंक के गेटवे का भी उपयोग किया।

यह भी खुलासा हुआ कि जीएसटी चोरी करने वालों ने ऐसी फर्जी फर्मों को रेंट एग्रीमैंट, बिजली बिल, पैन कार्ड आदि कई अन्य जाली दस्तावेजों के द्वारा स्थापित किया। जांच में यह पाया गया कि इन फर्जी फर्मों का कोई व्यावसायिक परिसर या कोई स्टॉक रजिस्टर नहीं था और बिना खरीद रजिस्टर के सब काम किर रहे थे।  इसके अलावा, फर्म के नाम पर कोई बुनियादी ढांचा भी नहीं था।

 

 

Source : Agency

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